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वकालत के पुरोधा एच.आर. प्रजापति नहीं रहे. जिनकी उपस्थिति ही जीत का पर्याय थी

 'अत्यंत दुख का विषय'

धमतरी: जिले के साथ आसपास के एतराफ के जाने-माने वरिष्ठ अधिवक्ता माननीय एच.आर. प्रजापति जी का अस्वस्थता के चलते देहावसान हो गया है, उनकी अंतिम यात्रा उनके गृह निवास बांसपारा से आज दोपहर 2:00 बजे शांति घाट के लिए निकलेगी। वे सीनियर वकील तरुण प्रजापति, भूपेश दत्त प्रजापति और देवेश दत्त प्रजापति के पिता थे। उन्होंने अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ रखा है उनके निधन की खबर के बाद न्यायिक जगत में शोक की लहर व्याप्त हो गई है, लोगों का कहना है कि पूरे जीवन अपने सिद्धांतों पर चलने वाले एच आर प्रजापति ने अधिवक्ता व्यवसाय को लेकर भी ऐसी मिसाल छोड़ी है कि लोग आज भी उनकी प्रशंसा से नहीं चूकते। धमतरी के आसपास ऐसा कोई भी बार एसोसिएशन नहीं है जहां उनसे वकालत की बारीकियां  सीख कर पैरवी के नए सोपान अधिवक्तागण ना गढ़ रहे हो। 


बताया जाता है कि नहर सत्याग्रह के लिए पहचाने जाने वाले ग्राम कंडेल के मूल निवासी होलाराम प्रजापति जी इतने सिद्धस्त अधिवक्ता थे कि केस का डिटेल सुनने के बाद पहले ही संभावना व्यक्त कर देते थे कि ऊंट किस करवट बैठेगा। नए संशोधनों पर अधिवक्ता गण ही क्या नए जज भी उनसे रायशुमारी के लिए गुरेज नहीं करते थे। उनके निधन को लोगों ने अधिवक्ता व्यवसाय के एक युग का विश्राम बताया है। लेकिन अपने पीछे उन्होंने जिन लोगों को वकालत के गुर सिखाए है उनकी व्यावसायिक गतिविधियों में एच आर प्रजापति जी का अक्श कई दशकों तक प्रतिबिंबित रहेगा।